वॉशिंगटन, डीसी: सोशल मीडिया आज की डिजिटल दुनिया का एक अनिवार्य हिस्सा बन गया है, लेकिन अमेरिका में अध्ययन कर रहे भारतीय और अन्य विदेशी छात्रों के लिए यह चिंता का विषय बनता जा रहा है। अमेरिकी विदेश विभाग (DOS) उन छात्रों पर कड़ी नजर रख रहा है, जो पढ़ाई के नाम पर सोशल मीडिया पर राजनीतिक गतिविधियों में संलग्न पाए जाते हैं। दोषी पाए जाने पर न केवल उनके वीजा रद्द किए जा रहे हैं, बल्कि उन्हें देश छोड़ने के लिए भी मजबूर किया जा रहा है।
सोशल मीडिया पर गतिविधियों से खतरा
विदेशी छात्रों को यह समझना बेहद जरूरी हो गया है कि अमेरिका में सोशल मीडिया पर कोई भी राजनीतिक टिप्पणी करना या किसी विवादास्पद पोस्ट को लाइक या शेयर करना गंभीर परिणाम दे सकता है। अमेरिकी सरकार इन गतिविधियों को राजनीतिक हस्तक्षेप के रूप में देख रही है, और इसका सीधा असर वीजा स्टेटस पर पड़ सकता है।
अगर कोई छात्र अमेरिकी नीतियों के विरोध में कोई पोस्ट शेयर करता है, या विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी सामग्री पर प्रतिक्रिया देता है, तो उसे अमेरिका में रहने के लिए खतरा हो सकता है।
ट्रम्प प्रशासन के बाद से कड़ी निगरानी
डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति बनने के बाद से इस प्रकार की निगरानी और कार्रवाई में बढ़ोतरी हुई है। 2017 में लागू की गई सख्त वीजा नीतियों के बाद से यह प्रक्रिया और अधिक कड़ी हो गई है। अब अमेरिकी सरकार शैक्षणिक संस्थानों पर भी नजर रख रही है और सोशल मीडिया पर सरकार विरोधी विचार रखने वाले छात्रों को चिह्नित कर रही है।
यदि कोई छात्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन में भाग लेता है या सोशल मीडिया पर सरकार की नीतियों की आलोचना करता है, तो उसे वीजा रद्द होने का खतरा हो सकता है।
सैकड़ों छात्रों पर कार्रवाई
हाल ही में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां अमेरिकी सरकार ने भारतीय और अन्य विदेशी छात्रों को वीजा रद्द करने संबंधी ईमेल भेजे हैं।
पहले माना जा रहा था कि केवल कैंपस में विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर ही कार्रवाई हो रही है, लेकिन अब सोशल मीडिया पर भी निगरानी की जा रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम के जरिए संदिग्ध छात्रों की प्रोफाइल स्कैन की जा रही हैं। यदि किसी छात्र की सोशल मीडिया गतिविधि संदिग्ध पाई जाती है, तो उसे अमेरिका में प्रवेश देने से इंकार किया जा सकता है।
तीन सप्ताह में 300 वीजा रद्द
रिपोर्टों के अनुसार, 2023-24 के दौरान लगभग 1.1 मिलियन विदेशी छात्र अमेरिका में अध्ययन के लिए पहुंचे, जिनमें 331,000 भारतीय छात्र भी शामिल थे। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा शुरू किए गए 'कैच एंड रिवोक' अभियान के तहत, पिछले तीन सप्ताह में 300 छात्रों के वीजा रद्द किए गए हैं।
यदि किसी छात्र को आतंकवादी संगठनों या अमेरिका विरोधी गतिविधियों का समर्थन करते हुए पाया जाता है, तो उसे तत्काल निर्वासित कर दिया जाता है। विदेश मंत्रालय द्वारा एक आधिकारिक नोटिस जारी किया जाता है, जिसमें संबंधित छात्र को सूचित किया जाता है कि उसका वीजा रद्द कर दिया गया है।
सख्त जांच और स्क्रीनशॉट लेने की प्रक्रिया
अमेरिकी सरकार बिना वीजा रह रहे छात्रों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रही है। यदि कोई छात्र वीजा रद्द होने के बावजूद अमेरिका में रहता है, तो उसे हिरासत में लिया जा सकता है और भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे वीजा आवेदकों की गहन जांच करें और सोशल मीडिया गतिविधियों का विश्लेषण करें। यदि कोई छात्र संदिग्ध गतिविधियों में शामिल पाया जाता है, तो उसके सोशल मीडिया पोस्ट और कमेंट्स के स्क्रीनशॉट लिए जाएंगे ताकि किसी भी बदलाव को ट्रैक किया जा सके।
क्या करना चाहिए?
अमेरिका में अध्ययन कर रहे छात्रों को निम्नलिखित सावधानियां बरतनी चाहिए:
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सोशल मीडिया पर सतर्कता: किसी भी राजनीतिक पोस्ट को लाइक, शेयर या टिप्पणी करने से बचें।
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संवेदनशील विषयों से दूरी: अमेरिकी नीतियों, सरकार, या अन्य संवेदनशील मुद्दों पर सार्वजनिक चर्चा से बचें।
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वीजा नियमों का पालन: वीजा शर्तों का उल्लंघन न करें और यदि किसी प्रकार की कानूनी समस्या आती है तो तत्काल दूतावास से संपर्क करें।
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संभावित जोखिमों से अवगत रहें: सोशल मीडिया गतिविधियों को ध्यान से संचालित करें और अपनी ऑनलाइन छवि का प्रबंधन करें।
निष्कर्ष
सोशल मीडिया के माध्यम से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार सभी को है, लेकिन अमेरिका में अध्ययन कर रहे विदेशी छात्रों को इस अधिकार का प्रयोग सावधानीपूर्वक करना होगा। अमेरिकी सरकार की सख्त नीतियों के कारण, अनजाने में किया गया कोई भी ऑनलाइन कार्य उनकी शिक्षा और भविष्य को खतरे में डाल सकता है। छात्रों को सतर्क रहने और वीजा नियमों का पूरी तरह पालन करने की जरूरत है, ताकि वे अपनी शिक्षा पूरी कर सकें और किसी भी अनावश्यक कानूनी कार्रवाई से बच सकें।