झांसी न्यूज डेस्क: झांसी में आईपीएल सट्टेबाजी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने बुधवार को तीन और मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई करीब 100 करोड़ रुपये के सट्टेबाजी गिरोह के खुलासे के एक दिन बाद हुई है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) बीबीजीटीएस मूर्ति ने बताया कि पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम ने कानपुर-ग्वालियर बाईपास पर घेराबंदी कर इन आरोपियों को दबोचा। इस दौरान आरोपियों ने भागने की कोशिश में पुलिस की गाड़ी को टक्कर भी मारी, जिससे दो पुलिसकर्मी घायल हो गए।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान शुभम उपाध्याय, विजय वाधवा और नितिन अग्रवाल के रूप में हुई है, जो सभी झांसी के रहने वाले हैं। पुलिस ने इनके पास से आठ मोबाइल फोन, एक टैबलेट और नकदी बरामद की है। साथ ही, इनके बैंक खातों में जमा करीब 50 लाख रुपये फ्रीज कर दिए गए हैं। जांच में सट्टेबाजी के लेन-देन से संबंधित ऐसे रजिस्टर मिले हैं, जिनमें लगभग 100 करोड़ रुपये के कारोबार का हिसाब-किताब दर्ज है।
पूछताछ में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि सट्टेबाजी की अवैध कमाई को अचल संपत्ति में निवेश किया गया था। आरोपी शुभम उपाध्याय ने स्वीकार किया कि उसने इस काले पैसे से पांच प्लॉट और दो फार्महाउस खरीदे थे। इस रैकेट के तार ऊंचे पदों तक जुड़े होने के संकेत मिले हैं, क्योंकि पुलिस ने आठ अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया है जो फिलहाल फरार हैं। इनमें एक वरिष्ठ भाजपा नेता, बैंक निदेशक और पार्षदों के पतियों के नाम शामिल होने की चर्चा है।
फरार आरोपियों में झांसी और कानपुर के कई रसूखदार लोग शामिल हैं, जिनकी तलाश में पुलिस की कई टीमें छापेमारी कर रही हैं। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और जुआ अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया है। एसएसपी ने स्पष्ट किया है कि पुलिस का मुख्य उद्देश्य जिले में सक्रिय इस पूरे सट्टेबाजी नेटवर्क को जड़ से खत्म करना है।