ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में आ रहे उतार-चढ़ाव के बीच घरेलू बाजार से उपभोक्ताओं के लिए एक राहत भरी खबर है। आज शनिवार, 30 मई 2026 को देश की सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई नया बदलाव नहीं किया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल सस्ता होने के बाद आम जनता को उम्मीद थी कि खुदरा कीमतों में कुछ कटौती देखने को मिलेगी, लेकिन फिलहाल घरेलू बाजार में दाम जस के तस बने हुए हैं। तेल कीमतों में यह स्थिरता एक ऐसे दौर में आई है, जब पिछले महज 11 दिनों के भीतर ही देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 7.35 रुपये और डीजल 7.82 रुपये प्रति लीटर तक महंगा हो चुका है।
11 दिनों में चार बार लगा महंगाई का झटका
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव संपन्न होते ही देश में ईंधन की कीमतों में तेजी का दौर शुरू हो गया था। चुनाव के समय जो कीमतें पूरी तरह स्थिर बनी हुई थीं, उन्होंने चुनावी नतीजे आते ही उपभोक्ताओं के मासिक बजट को बिगाड़ दिया। पेट्रोलियम कंपनियों ने सिर्फ 11 दिनों के भीतर चार चरणों में कीमतें बढ़ाईं:
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15 मई 2026: पहली बड़ी बढ़ोतरी करते हुए पेट्रोल में 3 रुपये और डीजल में 3.29 रुपये का इजाफा किया गया।
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19 मई 2026: दोनों ईंधनों के दाम में क्रमशः 87 पैसे और 91 पैसे की बढ़ोतरी हुई।
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23 मई 2026: चार दिन बाद एक बार फिर इसी अनुपात (87 पैसे और 91 पैसे) में दाम बढ़ाए गए।
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25 मई 2026: चौथे चरण में पेट्रोल 2.61 रुपये और डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा कर दिया गया।
तेल कंपनियों के घाटे में आई कमी
ईंधन की कीमतों में इस भारी बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहा तनाव मुख्य कारण है। ईरान युद्ध की शुरुआत के बाद ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक लगभग 50 प्रतिशत का भारी उछाल आ गया था। इस महंगे क्रूड ऑयल के चलते सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और जेट फ्यूल की बिक्री पर रोजाना करीब 1,380 करोड़ रुपये का घाटा उठाना पड़ रहा था।
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी पहले स्पष्ट किया था कि कंपनियों का दैनिक नुकसान 1,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया था। हालांकि, पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के हालिया बयान के अनुसार, पिछले दिनों की गई चार चरणों की मूल्य वृद्धि के बाद अब कंपनियों का यह दैनिक घाटा कम होकर 750 करोड़ रुपये रह गया है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में नरमी के बावजूद कंपनियां फिलहाल कीमतों को स्थिर रखकर अपने पुराने घाटे की भरपाई करने में जुटी हैं।