झांसी न्यूज डेस्क: स्कूलों में छात्रों की सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। बुधवार को जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में जिलाधिकारी गौरांग राठी ने निर्देश दिए कि सभी स्कूल प्रबंधक यह प्रमाणित करेंगे कि कोई भी छात्र बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस और हेलमेट के दोपहिया वाहन चलाकर स्कूल न आए। यदि स्कूल यूनिफॉर्म में 18 वर्ष से कम आयु का कोई छात्र वाहन चलाते समय दुर्घटना का शिकार होता है, तो संबंधित स्कूल के प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
डीएम ने स्पष्ट कहा कि किसी भी हालत में अनफिट स्कूली वाहन सड़क पर नहीं चलने चाहिए। यदि जांच के दौरान ऐसे वाहन संचालित मिले, तो संबंधित विद्यालय की मान्यता तक निरस्त की जा सकती है। उन्होंने स्कूल प्रबंधन से यह भी कहा कि यदि कोई छात्र यातायात नियमों का उल्लंघन करता है या स्टंटबाजी करते हुए स्कूल आता है, तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए।
बैठक में स्कूलों से बच्चों को लाने-ले जाने वाले सभी वाहनों और उनके चालकों का पूरा विवरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। साथ ही एआरटीओ को स्कूली वाहनों की नियमित जांच, चालकों का पुलिस सत्यापन और मेडिकल परीक्षण सुनिश्चित करने को कहा गया।
एआरटीओ हेमचंद्र गौतम ने बताया कि जिले के 2,436 स्कूलों में से अब तक 2,402 की जांच पूरी की जा चुकी है। इसके अलावा 511 स्कूली बसों का फिटनेस परीक्षण किया गया, जिनमें 13 वाहनों का पंजीकरण निलंबित किया गया है।
बैठक में एडीएम शिव प्रताप शुक्ल, एडीएम अरुण कुमार गौड़, एसपी सिटी प्रीति सिंह, डीआईओएस रती वर्मा, एआरटीओ एस.के. अग्रवाल, अपर नगर आयुक्त रोली गुप्ता सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।