झांसी न्यूज डेस्क: झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार को पहली बार दिमाग के पीनियल रीजन में बने ट्यूमर की सर्जरी की गई। डॉक्टरों के मुताबिक, ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत में तेजी से सुधार हो रहा है। खास बात यह है कि ललितपुर के देलवारा निवासी 41 वर्षीय राजेंद्र कुमार इलाज के लिए एम्स नागपुर और एम्स भोपाल गए थे, लेकिन दोनों जगह सर्जरी में गंभीर जोखिम की बात कहे जाने के बाद उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा था। राजेंद्र को लंबे समय से सिर में तेज दर्द, चक्कर आने और नींद नहीं आने जैसी परेशानियां हो रही थीं।
कई जगह इलाज कराने के बाद भी जब राजेंद्र को आराम नहीं मिला, तो परिचितों की सलाह पर उन्होंने एम्स नागपुर में जांच कराई। यहां पता चला कि उनके दिमाग के पीनियल रीजन में ट्यूमर है। डॉक्टरों ने ऑपरेशन को जोखिम भरा बताया, जिसके बाद वह वहां से लौट आए। इसके बाद उन्होंने एम्स भोपाल में इलाज कराने की कोशिश की, लेकिन वहां भी गंभीर खतरे की आशंका जताते हुए सर्जरी करने से मना कर दिया गया। आखिरकार वह अपनी रिपोर्ट लेकर झांसी मेडिकल कॉलेज पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने दोबारा जांच के बाद ऑपरेशन का फैसला किया।
मेडिकल कॉलेज के न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. दिनेश राजपूत ने बताया कि शुक्रवार को ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप की मदद से ट्यूमर निकाला गया। सर्जरी करीब ढाई घंटे तक चली। उन्होंने बताया कि पीनियल रीजन दिमाग के काफी अंदर होता है और इसके आसपास कई अहम संरचनाएं और खून की नसें मौजूद रहती हैं। ऐसे में ऑपरेशन के दौरान इन नसों को नुकसान से बचाना बेहद जरूरी था। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुधीर कुमार के मुताबिक, यह न सिर्फ कॉलेज, बल्कि पूरे बुंदेलखंड में पीनियल रीजन ट्यूमर की पहली सफल सर्जरी है।
इस ऑपरेशन की टीम का नेतृत्व डॉ. दिनेश राजपूत ने किया। उनके साथ डॉ. एचपी राय, डॉ. विनीत, डॉ. निखिल और डॉ. हर्ष शामिल रहे, जबकि एनेस्थीसिया टीम की जिम्मेदारी डॉ. अशोक मित्तल ने संभाली। पीनियल ग्रंथि दिमाग के दोनों हिस्सों के बीच, वेंट्रिकल के पीछे होती है और आकार में चावल के दाने जितनी होती है। इसे आम भाषा में तीसरी आंख भी कहा जाता है। यह मेलाटोनिन हार्मोन बनाती है, जो शरीर के सोने और जागने के समय को नियंत्रित करने में मदद करता है। इस हिस्से में असामान्य वृद्धि होने पर उसे पीनियल रीजन ट्यूमर कहा जाता है।