झांसी न्यूज डेस्क: ग्वालियर में बुनियादी ढांचे के विकास की सुस्त रफ्तार और गैर-जिम्मेदाराना प्लानिंग ने स्थानीय नागरिकों की दिनचर्या को दुश्वार कर दिया है। शहर की दो प्रमुख जीवन रेखाएं, सचिन तेंदुलकर मार्ग और झांसी रोड, वर्तमान में बदहाली का शिकार हैं। लोक निर्माण विभाग और स्मार्ट सिटी प्रशासन के बीच समन्वय की कमी के चलते निर्माण कार्य कछुआ गति से चल रहा है, जिसका सीधा असर राहगीरों के स्वास्थ्य और उनके कीमती समय पर पड़ रहा है।
सड़कों के निर्माण के दौरान इंजीनियरिंग के बुनियादी सिद्धांतों की भी अनदेखी की जा रही है। सचिन तेंदुलकर रोड पर पानी के छिड़काव का अभाव है, जिससे उठने वाला धूल का गुबार वायु प्रदूषण का कारण बन रहा है। वहीं, एजी पुल से विक्की फैक्ट्री तक के हिस्से में व्हाइट टॉपिंग तकनीक का बेतरतीब इस्तेमाल किया जा रहा है। अधिकारियों का यह तर्क कि डामरीकरण के लिए मानसून का इंतजार किया जाएगा, विभागीय अदूरदर्शिता को साफ दर्शाता है।
निर्माण की राह में अतिक्रमण एक और बड़ी बाधा बनकर उभरा है, जिसे दूर करने में प्रशासन अब तक विफल रहा है। झांसी रोड पर चिन्हित किए गए 72 अवैध कब्जों पर कार्रवाई न होने से फोरलेन प्रोजेक्ट अधर में लटका है। तपोवन से नाका चंद्रवदनी के बीच सड़कों पर बने जानलेवा गड्ढे और दिनभर लगने वाला जाम स्मार्ट सिटी के दावों की पोल खोल रहे हैं। सड़कों की इस खुदाई ने व्यापारिक गतिविधियों को भी बुरी तरह प्रभावित किया है।
जनता के बीच सरकारी कार्यप्रणाली को लेकर गहरा आक्रोश है क्योंकि धूल भरी सड़कों पर सफर करना अब जोखिम भरा हो गया है। बिना उचित ड्रेनेज और अतिक्रमण हटाए बिना शुरू किए गए इन प्रोजेक्ट्स ने व्यवस्थित शहर की कल्पना को धूल-धूसरित कर दिया है। जब तक एजेंसियां अपनी 'वेट एंड वॉच' की नीति त्यागकर धरातल पर समयबद्ध कार्य नहीं करतीं, तब तक ग्वालियर के नागरिकों को इन टूटी सड़कों और जाम से राहत मिलने की उम्मीद कम ही नजर आती है।