झांसी न्यूज डेस्क: उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश को जोड़ने वाले प्रमुख रेल मार्ग ग्वालियर-झांसी रेलखंड पर मानसून के आगमन से पहले रेलवे ने बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) को मजबूत और सुरक्षित बनाने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है। बारिश के मौसम में पुलों को नमी, पानी और जंग से बचाने के लिए रेलवे करीब 2 करोड़ 90 लाख रुपये की भारी राशि खर्च करने जा रहा है। इस विशेष बजट से रेलखंड पर स्थित छोटे-बड़े पुलों की व्यापक मरम्मत की जाएगी और उन पर जंग-रोधी (एंटी-कोरोजन) पेंटिंग की कोटिंग चढ़ाई जाएगी, ताकि भारी बारिश के दौरान भी ट्रेनों का संचालन पूरी तरह सुरक्षित और निर्बाध रूप से जारी रह सके।
ग्वालियर से झांसी के बीच का यह रेलखंड लगभग 163 किलोमीटर लंबा है, जिस पर 130 से अधिक छोटे और बड़े रेलवे पुल बने हुए हैं। इस रूट से रोजाना दर्जनों वीआईपी, सुपरफास्ट, एक्सप्रेस और मालगाड़ियां गुजरती हैं। मानसून के दौरान इन पुलों के लोहे के गर्डरों पर पानी जमा होने और हवा में नमी बढ़ने से जंग लगने का खतरा काफी बढ़ जाता है। इस खतरे को समय रहते टालने के लिए रेलवे ने यह सुरक्षात्मक कदम उठाया है। इस योजना के दायरे में केवल रेलवे के मुख्य पुल ही नहीं, बल्कि यात्रियों के इस्तेमाल में आने वाले फुट ओवरब्रिज (FOB), सड़क यातायात के लिए बने रोड ओवरब्रिज (ROB) और ट्रैक गर्डर ब्रिज को भी शामिल किया गया है।
मरम्मत और रखरखाव की इस प्रक्रिया के तहत तकनीकी टीमें सबसे पहले पुलों और पुलियाओं के लोहे के ढांचों पर जमी पुरानी जंग को पूरी तरह से साफ करेंगी। इसके बाद, सतह पर उच्च गुणवत्ता वाली एंटी-कोरोजन कोटिंग (जंग-रोधी परत) और विशेष पेंट लगाया जाएगा। यह कोटिंग लोहे को मौसम के प्रतिकूल प्रभावों से बचाएगी, जिससे पुलों की संरचनात्मक मजबूती बनी रहेगी। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इस तरह के समयबद्ध और सुरक्षात्मक कार्यों से पुलों की कार्यक्षमता और उम्र (लाइफस्पैन) काफी बढ़ जाती है, जिससे भविष्य में होने वाले बड़े हादसों का रिस्क खत्म होता है और बार-बार होने वाला मरम्मत का खर्च भी घटता है।
झांसी रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) मनोज सिंह ने इस परियोजना के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि इस पूरे रखरखाव अभियान को एक वर्ष के भीतर पूरा करने का कड़ा लक्ष्य (डेडलाइन) तय किया गया है। काम पूरा होने के बाद इस रूट के सभी पुल न केवल तकनीकी रूप से पहले से कहीं अधिक सुरक्षित हो जाएंगे, बल्कि उनका दृश्य स्वरूप भी बेहतर और साफ-सुथरा नजर आएगा। रेलवे का यह कदम यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और रेल अधोसंरचना को आधुनिक व सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और सराहनीय प्रयास है।