झांसी न्यूज डेस्क: प्रयागराज के कसारी-मसारी कब्रिस्तान में शुक्रवार को अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे 21 वर्षीय अबान अहमद के लिए कब्र तैयार की गई। अगस्त की तेज धूप के बीच मजदूर कब्र खोद रहे थे और पुलिसकर्मी सुरक्षा में तैनात थे। अबान का शव झांसी में पोस्टमॉर्टम के बाद प्रयागराज लाया गया। परिवार ने उसे उसके पिता अतीक अहमद और चाचा अशरफ के पास दफनाने का फैसला किया। इसी जगह कुछ दूरी पर अबान के बड़े भाई असद अहमद की भी कब्र है, जिसकी 2023 में झांसी में पुलिस मुठभेड़ में मौत हुई थी।
अबान की मौत गुरुवार को झांसी-कानपुर हाईवे पर हुए सड़क हादसे में हुई थी। वह अपने जेल में बंद बड़े भाई अली अहमद से मिलने झांसी जा रहा था। तेज रफ्तार एसयूवी डिवाइडर से टकरा गई, जिसमें अबान और उसके एक दोस्त की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हुए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसे के बाद अबान ने मदद के लिए आवाज लगाई थी। परिवार के लिए यह एक और बड़ा सदमा है, क्योंकि अबान ने अपने पिता और बड़े भाई की मौत के बाद बेहद कठिन दौर में जिंदगी बिताई थी।
अबान के अंतिम संस्कार के दौरान उसकी मां शाइस्ता परवीन की गैरमौजूदगी भी चर्चा में रही। शाइस्ता 2023 से उमेश पाल हत्याकांड में आरोपी बनाए जाने के बाद फरार हैं। बेटे की मौत के बाद उनके अंतिम संस्कार में पहुंचने की अटकलें लगाई जा रही थीं, जिसके चलते सुरक्षा एजेंसियों ने कब्रिस्तान और प्रयागराज में आने-जाने वाले रास्तों पर निगरानी बढ़ा दी थी। हालांकि, शुक्रवार दोपहर तक शाइस्ता वहां नहीं पहुंचीं। अतीक परिवार की मौजूदा स्थिति देखें तो उसके दो बेटे जेल में हैं, असद की मुठभेड़ में मौत हो चुकी है और अबान की सड़क हादसे में जान चली गई।
कसारी-मसारी कब्रिस्तान में अब अतीक, अशरफ, असद और अबान की कब्रें एक-दूसरे के करीब हैं। कभी राजनीतिक रसूख और अपराध की दुनिया में प्रभाव रखने वाले इस परिवार की कहानी पिछले तीन वर्षों में पूरी तरह बदल गई है। अतीक और अशरफ की 2023 में हत्या, असद की मुठभेड़ में मौत और अबान के सड़क हादसे ने परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है। आज उसी परिवार की चार कब्रें उस दौर की खामोश गवाह हैं, जब अतीक अहमद का नाम प्रयागराज की सियासत और अपराध की दुनिया में बेहद प्रभावशाली माना जाता था।