झांसी न्यूज डेस्क: बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के 31वें दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने छात्र-छात्राओं को सिर्फ डिग्री और मेडल तक सीमित न रहने, बल्कि आत्मविश्वास और हुनर के साथ आगे बढ़ने की सीख दी। गुरुवार को हुए समारोह में उन्होंने मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया और खास तौर पर बेटियों से बेखौफ होकर अपनी जिंदगी की चुनौतियों का सामना करने को कहा।
बेटियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने झांसी की रानी का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि लड़कियों में उसी तरह हिम्मत होनी चाहिए और अगर कोई उन्हें परेशान करने की कोशिश करे तो उसका डटकर मुकाबला करें। उन्होंने युवाओं से कहा कि उन्हें खुद को इतना मजबूत बनाना चाहिए कि किसी भी मुश्किल परिस्थिति का सामना कर सकें।
पढ़ाई के साथ हुनर भी जरूरी
आनंदीबेन पटेल ने कहा कि आज के समय में सिर्फ किताबों से मिली जानकारी काफी नहीं है। युवाओं को पढ़ाई के साथ अलग-अलग स्किल सीखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अपनी प्रतिभा और हुनर के जरिए युवा न सिर्फ अपना भविष्य बेहतर बना सकते हैं, बल्कि समाज और देश के विकास में भी योगदान दे सकते हैं।
बच्चों को गलती के बाद सुधारने का मौका दें
राज्यपाल ने बच्चों को लेकर समाज की जिम्मेदारी पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि अगर छोटी उम्र में किसी बच्चे से गलती हो जाती है तो उसे हमेशा के लिए गलत नजर से देखने के बजाय सुधारने का मौका देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बच्चों को सही रास्ते पर लाने में परिवार के साथ समाज की भी बड़ी भूमिका है। बच्चों को डांटने या दूर करने के बजाय उन्हें समझाकर दोबारा अपने साथ जोड़ने की कोशिश करनी चाहिए।
नैक मूल्यांकन को लेकर चिंता
विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता पर बात करते हुए राज्यपाल ने नैक व्यवस्था को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के कई विश्वविद्यालयों ने नैक में अच्छी रैंकिंग हासिल की है, लेकिन पुरानी नैक व्यवस्था बंद होने के बाद विश्वविद्यालयों के मूल्यांकन को लेकर चुनौती खड़ी हो सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि इसका असर विश्वविद्यालयों को मिलने वाली आर्थिक मदद पर पड़ सकता है। इसलिए संस्थानों को लगातार नई तकनीक, नए विचार और बेहतर काम करने के तरीकों पर ध्यान देना होगा।
81 विद्यार्थियों को मिला सम्मान
समारोह में कुल 81 विद्यार्थियों को पदक देकर सम्मानित किया गया। इनमें 35 विद्यार्थियों को कुलाधिपति पदक दिए गए, जिनमें 28 छात्राएं शामिल हैं। वहीं 46 विद्यार्थियों को विन्यासीकृत पदक प्रदान किए गए, जिनमें 37 छात्राएं हैं।
कला के क्षेत्र में योगदान के लिए राजस्थान के भीलवाड़ा के प्रसिद्ध पिचवाई चित्रकार दिनेश सोनी को डी.लिट की मानद उपाधि भी प्रदान की गई।
दहेज और बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाने की अपील
राज्यपाल ने युवाओं से सामाजिक बुराइयों के खिलाफ सक्रिय भूमिका निभाने को कहा। उन्होंने कहा कि युवा अगर बदलाव का फैसला कर लें तो समाज में बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से दहेज प्रथा, बाल विवाह और दूसरी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ लोगों को जागरूक करने और बदलाव की मुहिम का हिस्सा बनने की अपील की।