झांसी न्यूज डेस्क: उम्र, घूंघट और घर की जिम्मेदारियां भी महिलाओं और बुजुर्गों के पढ़ने-लिखने के हौसले को नहीं रोक सकीं। नव भारत साक्षरता मिशन के तहत रविवार को हुई नवसाक्षर परीक्षा में बड़ी संख्या में महिलाओं और बुजुर्गों ने हिस्सा लिया। कुछ महिलाएं घूंघट में परीक्षा देने पहुंचीं, तो कई परिवार के सदस्यों और गांव के बुजुर्गों के साथ केंद्रों पर आईं। जिले के 468 केंद्रों पर हुई परीक्षा में 6,329 में से 4,397 परीक्षार्थी शामिल हुए, जबकि 1,932 अनुपस्थित रहे। कुल उपस्थिति 69.48 प्रतिशत रही।
नव भारत साक्षरता मिशन के तहत 15 साल से अधिक उम्र के लोगों को पढ़ना-लिखना सिखाया जा रहा है। इनमें महिलाओं और बुजुर्गों की संख्या ज्यादा है। नवसाक्षरों को हिंदी, गणित, मात्रा, स्वर, शब्द बनाना, संख्या पहचानने, गिनती, जोड़-घटाव और गुणा-भाग जैसी जरूरी चीजें सिखाई गईं। इसमें स्वयंसेवकों ने भी अहम भूमिका निभाई। परीक्षा देकर बाहर निकली महिलाओं के चेहरों पर आत्मविश्वास और खुशी नजर आई। पढ़ाई सीखने के बाद परीक्षा देना उनके लिए किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं था।
कई महिलाओं ने घर के काम और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच समय निकालकर साक्षरता केंद्रों पर पढ़ाई की। दिनभर घरेलू काम में व्यस्त रहने के बावजूद उन्होंने अक्षर पहचानना और लिखना सीखा और अब परीक्षा देकर अपनी तैयारी को परखा। वहीं, कई बुजुर्गों ने भी उम्र की परवाह किए बिना पढ़ाई शुरू की। उनके लिए अपना नाम लिखना, अक्षर पहचानना, संख्याओं को समझना और रोजमर्रा के सवालों के जवाब देना सीखना इस अभियान का अहम हिस्सा रहा।
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक बंगरा में सबसे ज्यादा 100 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज हुई। मऊरानीपुर में 95.53 प्रतिशत और मोंठ में 95.25 प्रतिशत परीक्षार्थी परीक्षा में पहुंचे। दूसरी ओर बबीना, बड़ागांव और चिरगांव में उपस्थिति 51 प्रतिशत से भी कम रही। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी जितेंद्र कुमार ने बताया कि परीक्षा में महिलाओं की भागीदारी ज्यादा रही। डीसी कम्युनिटी मिर्जा अजीज बेग ने कहा कि बुजुर्गों के लिए अक्षर पहचानना, नाम लिखना और संख्या समझना सीखने की दिशा में अहम कदम है।