झांसी न्यूज डेस्क: अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी) शरद कुमार चौधरी की अदालत ने युवती से छेड़छाड़ और उसे आत्महत्या के लिए मजबूर करने के मामले में दोषी उमाकांत को चार साल की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर कुल 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की 50 फीसदी राशि पीड़ित पक्ष को प्रतिकर के रूप में देने का आदेश दिया गया है।
मामला 24 मार्च 2019 का है। बड़ागांव थाना क्षेत्र के एक गांव में उमाकांत पर युवती से छेड़छाड़ करने का आरोप लगा था। युवती के भाई ने घटना को देखा था। घटना से परेशान 18 वर्षीय युवती ने अगले दिन फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद पीड़िता के भाई की तहरीर पर बड़ागांव थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई और पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया।
बुधवार को सुनवाई के दौरान एडीजीसी ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए उमाकांत को अधिकतम सजा देने की मांग की। वहीं, बचाव पक्ष ने अदालत से सहानुभूति की अपील करते हुए कहा कि उमाकांत उसके परिवार का अकेला कमाने वाला सदस्य है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और मामले के तथ्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए दो अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई।
अदालत ने छेड़खानी की धारा में चार साल के कारावास के साथ 5 हजार रुपये जुर्माना लगाया। जुर्माना नहीं देने पर 15 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं, आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण की धारा में भी चार साल की सजा और 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया। जुर्माना नहीं देने पर एक महीने का अतिरिक्त कारावास होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोनों मामलों की सजाएं एक साथ चलेंगी।