झांसी न्यूज डेस्क: झांसी में केंद्रीय जीएसटी विभाग से जुड़े रिश्वत कांड में अब जांच और तेज हो गई है। कारोबारियों से 70 लाख रुपये की घूस लेने के आरोप में फंसे अधीक्षक अजय शर्मा और अनिल कुमार तिवारी के खिलाफ सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति का मामला भी दर्ज कर लिया है। इस कार्रवाई से मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
सीबीआई ने 30 दिसंबर को दोनों अधीक्षकों के साथ डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया था। जांच में खुलासा हुआ कि दोनों अधिकारियों ने अपनी वैध आय से कई गुना अधिक संपत्ति अर्जित की है। अजय शर्मा ने करीब चार साल में 1.11 करोड़ रुपये की आय के मुकाबले 4.57 करोड़ रुपये की संपत्ति बनाई, जबकि अनिल कुमार तिवारी ने 57.95 लाख रुपये की आय के बावजूद करीब 2 करोड़ रुपये खर्च किए।
यह पूरा मामला तब सामने आया जब जीएसटी टीम ने झोकन बाग स्थित जय अंबे प्लाईवुड और जय दुर्गा हार्डवेयर पर छापा मारा था। आरोप है कि टैक्स चोरी के मामले को रफा-दफा करने के लिए अफसरों ने कारोबारियों से डेढ़ करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी। बाद में सौदे की पहली किस्त के रूप में 70 लाख रुपये लेते समय सीबीआई ने उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इस पूरे रैकेट में अधिवक्ता नरेश कुमार गुप्ता ने बिचौलिए की भूमिका निभाई थी, जबकि राजू मंगनानी और अन्य कारोबारी भी इसमें शामिल थे। पूछताछ में अधीक्षकों ने डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी की भूमिका को भी अहम बताया, जिसके बाद उनके खिलाफ भी जांच जारी है और जल्द ही उन पर भी आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज हो सकता है।
सीबीआई ने इस मामले में सात नामजद आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया है और कई ठिकानों पर छापेमारी कर नकदी, जेवर और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज बरामद किए हैं। फिलहाल एजेंसी पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है।