झांसी न्यूज डेस्क: देश के सर्वोच्च न्यायालय ने मथुरा और झांसी के बीच तीसरी रेलवे लाइन के निर्माण के लिए पेड़ों की कटाई पर लगी रोक हटा ली है। अदालत ने पाया कि रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) ने प्रतिपूरक वनरोपण की शर्त पूरी कर ली है। यह रोक 14 अक्टूबर को उस समय लगाई गई थी जब परियोजना के तहत लगाए जाने वाले पौधों की संख्या पूरी नहीं की गई थी।
इस मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ को केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) ने बताया कि रेलवे को 13 मई, 2022 को 5,094 पेड़ काटने की अनुमति इस शर्त पर दी गई थी कि 50,943 पौधे लगाए जाएंगे। अब रिपोर्ट में यह पुष्टि हुई है कि वनरोपण का काम पूरा हो चुका है।
पीठ ने कहा कि हमने CEC की रिपोर्ट का अवलोकन किया है, जिसमें स्पष्ट है कि 50,943 पौधे लगाने की शर्त पूरी हो गई है। इस आधार पर अदालत ने 14 अक्टूबर के स्थगन आदेश को खारिज कर दिया और परियोजना पर आगे बढ़ने का रास्ता साफ कर दिया। यह परियोजना मथुरा और झांसी के बीच रेल लाइन के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है।
अक्टूबर में शीर्ष अदालत ने यह पाया था कि वनरोपण का काम समय पर पूरा नहीं हुआ था। इसके कारण रेलवे परियोजना को रोकने का आदेश दिया गया था। रेलवे निकाय की ओर से पेश वकील ने उस समय कहा था कि उत्तर प्रदेश वन विभाग को अनिवार्य वनरोपण के लिए जरूरी राशि मुहैया कराई गई थी।
रेलवे के वकील ने आगे कहा कि उत्तर-मध्य रेलवे के आगरा डिवीजन में मथुरा जंक्शन और झांसी के बीच एक बाईपास रेल लाइन का निर्माण किया जा रहा है। हालांकि, वन विभाग ने अदालत की शर्तों के अनुपालन की जिम्मेदारी रेलवे पर डाली थी, जिससे परियोजना में देरी हुई।
पीठ ने स्पष्ट किया कि पेड़ों की कटाई के लिए अदालत की अनुमति दी गई थी और यह देखना रेलवे निकाय की जिम्मेदारी थी कि शर्तों का पालन हो। अब जब प्रतिपूरक वनरोपण का काम पूरा हो चुका है, परियोजना को जल्द ही पूरा किया जा सकेगा।