झांसी न्यूज डेस्क: कामता प्रसाद और उनकी पत्नी लक्ष्मी इन दिनों बेघर होने की मार झेल रहे हैं। उनके बेटों ने पुश्तैनी घर बेचने के लिए जबरन दबाव डाला और विरोध करने पर उन्हें मारपीट कर घर से निकाल दिया। पिछले 20 दिनों से ये बुजुर्ग दंपती कभी रेलवे स्टेशन तो कभी सड़क किनारे रात गुजारने को मजबूर हैं। पुलिस से शिकायत करने पर भी कोई मदद नहीं मिली, बल्कि उन्हें टका सा जवाब दे दिया गया कि जब उनकी हत्या होगी, तब बेटों को गिरफ्तार किया जाएगा।
कामता प्रसाद, जो एक प्राइवेट जॉब करते हैं, और उनकी पत्नी लक्ष्मी, जो गृहिणी हैं, ने बताया कि उनके दो बेटे, राहुल और संतोष हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। दोनों को अलग-अलग मकान भी बनाकर दिए गए हैं, जबकि कामता और उनकी पत्नी अपने पुश्तैनी घर में रहते थे। लेकिन बेटों और बहुओं ने उन्हें वहां रहने नहीं दिया और मारपीट कर घर से निकाल दिया। जब वह कुछ कपड़े लेने वापस गए, तो बेटों ने बहुओं और दोस्तों के साथ मिलकर फिर से हमला किया और 70 हजार रुपये भी छीन लिए।
थाने से निराश होकर आखिरकार दंपती ने डीएम ऑफिस पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई। सिटी मजिस्ट्रेट प्रमोद झा ने उनकी आपबीती सुनी और मदद का भरोसा दिया। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए और कामता प्रसाद को अपना नंबर भी दिया, ताकि अगर बेटों ने फिर कोई गलत हरकत की तो वे सीधे संपर्क कर सकें। अब देखना यह है कि इस बुजुर्ग दंपती को इंसाफ मिलता है या फिर उन्हें यूं ही दर-दर की ठोकरें खानी पड़ेंगी।