झांसी न्यूज डेस्क: वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन कोषागार में भारी गतिविधि देखने को मिली, जहां विभिन्न विभागों को करीब 55 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। छुट्टी होने के बावजूद अधिकारी और कर्मचारी सुबह से ही दफ्तर पहुंच गए और देर रात तक काम जारी रखा। भुगतान की प्रक्रिया रात 12 बजे तक चलती रही।
बताया गया कि बजट समाप्त होने से पहले राशि का उपयोग सुनिश्चित करने के लिए विभागों ने लंबित बिलों को तेजी से प्रस्तुत किया। इससे पूरे दिन कोषागार में फाइलों का दबाव बना रहा और कर्मचारियों को लगातार काम करना पड़ा।
सबसे अधिक 21 करोड़ रुपये नियोजन विभाग द्वारा ग्रामीण अभियंत्रण सेवा (RES) को सड़क निर्माण कार्यों के लिए दिए गए। वहीं सिंचाई विभाग ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) को 8 करोड़ रुपये जारी किए। इसके अलावा बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने आवास विकास परियोजनाओं के लिए 5 करोड़ रुपये का भुगतान किया।
अन्य विभागों को भी पर्याप्त धनराशि दी गई। पीडब्ल्यूडी और सिंचाई विभाग को मिलाकर करीब 4 करोड़ रुपये मिले, जबकि मेडिकल कॉलेज ने यूपी प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन को 3.5 करोड़ और सीएंडडीएस को 3 करोड़ रुपये दिए। कृषि विभाग ने रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय को 2.5 करोड़ रुपये आवंटित किए।
इसके अतिरिक्त शिक्षा, स्वास्थ्य और वन विभाग सहित अन्य क्षेत्रों में भी करीब 7.5 करोड़ रुपये खर्च किए गए। अधिकारियों के अनुसार, वित्तीय वर्ष के अंतिम महीने में कुल मिलाकर लगभग 1500 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जिसमें केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत 1000 करोड़ रुपये शामिल हैं।