झांसी न्यूज डेस्क: उप निबंधक कार्यालय में तैनात तत्कालीन लिपिक विशाल कुमार पर 2013 में सरकारी राशि का गबन करने का आरोप साबित हुआ है। जांच में यह सामने आया कि विशाल ने 23,26,585 रुपये बैंक में जमा नहीं किए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए नवाबाद थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
न्यायालय की सुनवाई में अदालत ने सभी सबूतों का अध्ययन करने के बाद विशाल को दोषी पाया। सीजेएम ईश्वरशरण कन्नौजिया ने उसे सात साल की सजा और 1.75 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि यदि जुर्माना अदा नहीं किया गया, तो अतिरिक्त छह माह की जेल की सजा भुगतनी होगी।
पीओ नीरज सिंह ने बताया कि विशाल कुमार उस समय निबंधन कार्यालय में लिपिक के पद पर तैनात थे और उनकी जिम्मेदारी थी कि कार्यालय में होने वाली आय को चालान के माध्यम से बैंक में जमा किया जाए। अधिकारीयों ने कुछ चालानों का सत्यापन किया तो पता चला कि 23 लाख रुपये से अधिक राशि बैंक में जमा नहीं हुई थी, जिससे सरकारी गबन का मामला उजागर हुआ।
नवाबाद पुलिस ने आरोप पत्र कोर्ट में प्रस्तुत किया और अदालत ने सुनवाई के दौरान विशाल को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। इस सजा से यह स्पष्ट होता है कि सरकारी धन के गबन को लेकर कानून सख्ती से कार्रवाई करता है और अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराता है।